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जयपुर पुलिस का ऑपरेशन ‘म्यूल हंटर’: बीदासर के दो आरोपियों सहित 3 गिरफ्तार, बैंक खाते किराए पर देने वाला गिरोह बेनकाब

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जयपुर। साइबर ठगी की काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए बैंक खातों को किराए पर लेने वाले गिरोह के खिलाफ महेश नगर थाना पुलिस और साइबर सेल जयपुर दक्षिण ने बड़ी कार्रवाई की है। स्पेशल अभियान ‘ऑपरेशन म्यूल हंटर’ के तहत पुलिस ने तीन आरोपियों को धर दबोचा, जिनमें चूरू जिले के बीदासर निवासी दो शातिर बदमाश भी शामिल हैं।

पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने 1.50 लाख रुपए नकद, थाईलैंड की करेंसी, एक स्कॉर्पियो कार, विभिन्न बैंकों के एटीएम कार्ड और 4 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।

विद्यार्थियों और आम लोगों को बनाते थे शिकार

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पकड़े गए आरोपियों की पहचान आदिल बागड़वा (27, निवासी बीकानेर हाल महेश नगर जयपुर), हरिदास स्वामी (27, निवासी बीदासर) और लक्ष्मण दास स्वामी (28, निवासी बीदासर, दोनों हाल एसएफएस मानसरोवर जयपुर) के रूप में हुई है।

पुलिस पड़ताल में सामने आया कि आरोपी जयपुर के पॉश इलाकों में चाय की थड़ियों और कैफे पर बैठकर स्कूल-कॉलेज के छात्रों व सीधे-सादे लोगों को निशाना बनाते थे। उन्हें कमीशन का मोटा लालच देकर उनके बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) किराए पर लेते थे।

फर्जी गेमिंग साइट्स और तुरंत कैश निकासी

पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह संगठित गिरोह लोगों को फर्जी गेमिंग साइट्स के जरिए ठगी का शिकार बनाता था। ठगी का पैसा जैसे ही किराए पर लिए गए म्यूल खातों में आता, आरोपी तुरंत एटीएम या अन्य माध्यमों से कैश निकाल लेते थे। इस रकम से आरोपी ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे थे।

रेस्टोरेंट संचालक की शिकायत पर खुला राज

पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ 25 सितंबर को दर्ज हुई एक रिपोर्ट के बाद हुआ। महेश नगर निवासी रेस्टोरेंट संचालक सत्येंद्र कुमार मीना ने शिकायत दी थी कि पिछले 3-4 महीनों से उनके रेस्टोरेंट में आ रहे आदिल नामक युवक ने जान-पहचान बनाकर उनका बैंक खाता नंबर हासिल कर लिया। इसके बाद बिना जानकारी दिए उनके खाते में साइबर क्राइम का पैसा मंगवाकर निकाला जाने लगा।

तकनीकी जांच से दबोचे गए आरोपी

शिकायत मिलने पर महेश नगर थानाधिकारी हवासिंह और हेड कांस्टेबल लोकेश कुमार की टीम ने तकनीकी जांच शुरू की। बैंक ट्रांजेक्शन और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल पुलिस आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अब तक कितने रुपयों का लेन-देन हुआ है और इस नेटवर्क के तार किन-किन बड़े साइबर अपराधियों से जुड़े हैं।

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