35 सदस्यीय बोर्ड में बहुमत का जादुई आंकड़ा 18; 21 सितंबर को होने वाले मतदान से पहले त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी सियासत
बीदासर। बीदासर नगर पालिका अध्यक्ष (चेयरमैन) पद के चुनाव को लेकर शहर का सियासी पारा चरम पर पहुंच चुका है। यहां मुकाबला अब केवल 16 बनाम 13 का सीधा दलीय संघर्ष नहीं रहा, बल्कि बागी तेवरों और निर्दलीयों के दखल ने पूरे समीकरण को बेहद दिलचस्प बना दिया है।
हालिया निकाय चुनाव परिणामों में भाजपा के पास 16, कांग्रेस के पास 13 और 6 निर्दलीय पार्षद चुनकर आए हैं। पालिका में बोर्ड बनाने के लिए 18 पार्षदों का बहुमत होना अनिवार्य है। ऐसे में भाजपा को जहां जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए 2 और पार्षदों की दरकार है, वहीं कांग्रेस को बहुमत के लिए 5 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता है।

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मैदान में बचे 3 चेहरे और उलझा हुआ समीकरण

नाम वापसी की अंतिम तिथि तक चले राजनीतिक घटनाक्रम के बाद मैदान की तस्वीर साफ हो चुकी है:
- सुमन प्रजापत (भाजपा अधिकृत प्रत्याशी)
- सोना देवी (कांग्रेस अधिकृत प्रत्याशी)
- सरिता सिंघी (निर्दलीय प्रत्याशी / भाजपा बागी)
दूसरी ओर, कांग्रेस की बागी मानी जा रही वार्ड-26 की पार्षद समीम ने अंतिम दिन अपना निर्दलीय पर्चा वापस ले लिया, जिससे कांग्रेस खेमे ने काफी राहत की सांस ली है। लेकिन भाजपा के लिए अपनी ही पार्टी की पार्षद सरिता सिंघी का बतौर निर्दलीय मैदान में डटे रहना बड़ी चुनौती बन गया है।
| राजनीतिक दल / पक्ष | जीते गए पार्षद | बहुमत के लिए जरूरत | वर्तमान स्थिति और चुनौतियां |
| भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) | 16 | 2 और वोट | कागजों में सबसे बड़ी पार्टी, लेकिन बागी सरिता सिंघी के मैदान में होने से अपने 16 पार्षदों को एकजुट रखना और क्रॉस वोटिंग रोकना सबसे बड़ी चुनौती। |
| कांग्रेस (INC) | 13 | 5 और वोट | समीम के हटने से पार्टी कैडर एकजुट; अब पूरा फोकस 6 निर्दलीय पार्षदों को साधकर बहुमत के जादुई आंकड़े (18) तक पहुंचने पर। |
| निर्दलीय पार्षद | 06 | — | बीदासर चुनाव के असली ‘किंगमेकर’; इनका अंतिम रुख और गुप्त मतदान ही तय करेगा कि पालिका की कुर्सी किसके हाथ जाएगी। |
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भाजपा के सामने अपने 16 को संभालने की दोहरी चुनौती
कागजों के हिसाब से भाजपा के पास 16 विधायक/पार्षद हैं और वह बहुमत से सिर्फ 2 कदम दूर है। लेकिन, वार्ड-2 से निर्वाचित पार्षद सरिता सिंघी द्वारा पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ मैदान में डटे रहने से समीकरण उलझ गए हैं। यदि मतदान के दौरान भाजपा अपने कुनबे को एकजुट नहीं रख पाई, तो पार्टी का अंदरूनी गणित पूरी तरह बिगड़ सकता है।
उधर, कांग्रेस के पास 13 पार्षद हैं। समीम का नामांकन हटने के बाद कांग्रेस सोना देवी के पक्ष में अपनी ताकत झोंक रही है। पार्टी की रणनीति अब उन 6 निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में लाने पर टिकी है, जिनके समर्थन के बिना कोई भी दल चेयरमैन की कुर्सी तक नहीं पहुंच सकता।
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21 सितंबर को होगा असली फैसला
बीदासर की इस सियासी जंग में अब सारा दारोमदार 21 सितंबर को होने वाले मतदान पर टिक गया है। क्या भाजपा अपने 16 के आंकड़े को 18 तक पहुंचाकर बागी चुनौती को पार कर पाएगी? क्या कांग्रेस कोई बड़ा उलटफेर कर पाएगी? या फिर ये 6 निर्दलीय पार्षद मिलकर बीदासर की राजनीति का नया अध्याय लिखेंगे? इन सभी सवालों के जवाब 21 सितंबर की मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
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