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बीदासर निकाय चुनाव: वार्ड 27 में भाजपा की बड़ी चूक, टिकट मिला लेकिन प्रत्याशी नहीं भर पाई नामांकन

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टिकट के लिए कई दावेदार थे, अंतिम समय में सुमित्रा देवी को मिला था सिंबल; पर्चा दाखिल न होने से मैदान से बाहर हुई पार्टी

बीदासर। नगर निकाय चुनाव में वार्ड नंबर 27 का घटनाक्रम भारतीय जनता पार्टी के लिए बड़ी फजीहत और चर्चा का विषय बन गया है। इस वार्ड में भाजपा के टिकट के लिए दावेदारों की लंबी कतार थी। लंबी खींचातान के बाद पार्टी ने अंतिम समय में सुमित्रा देवी के नाम पर मुहर लगाते हुए उन्हें आधिकारिक सिंबल भी सौंप दिया था, लेकिन नामांकन की अंतिम समय-सीमा तक उनका पर्चा दाखिल ही नहीं हो सका। नतीजा यह हुआ कि वार्ड 27 में भाजपा का कोई भी अधिकृत उम्मीदवार चुनावी मैदान में नहीं उतर पाया।

नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आई इस स्थिति ने भाजपा की स्थानीय चुनावी रणनीति और सांगठनिक तालमेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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अंतिम समय में सिंबल आवंटन पड़ा भारी

निकाय चुनाव को लेकर भाजपा में पिछले कई दिनों से टिकट वितरण को लेकर मंथन चल रहा था। वार्ड 27 में भी सिंबल पाने के लिए कई मजबूत दावेदार आमने-सामने थे। बगावत से बचने के लिए पार्टी ने रणनीति के तहत नामांकन के ऐन वक्त पर सुमित्रा देवी को प्रत्याशी घोषित किया और सिंबल थमाया।

हालांकि, ऐन वक्त की यह रणनीति पार्टी पर ही भारी पड़ गई। प्रत्याशी समय रहते अपना नामांकन दाखिल करने की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकीं। इसके चलते भाजपा मुकाबला शुरू होने से पहले ही इस सीट पर रेस से बाहर हो गई।

जीत-हार से पहले ही रेस से बाहर, उठ रहे ये बड़े सवाल

चुनाव में जीत-हार का फैसला मतदाता करते हैं, लेकिन पर्चा दाखिल न होने की वजह से भाजपा के पास इस वार्ड में अपनी किस्मत आजमाने का मौका तक नहीं बचा। स्थानीय राजनीतिक गलियारों में अब ये सवाल तेजी से तैर रहे हैं:

  • समन्वय की कमी: जिस वार्ड में कार्यकर्ताओं और नेताओं की फौज थी, वहां नामांकन की साधारण प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हो पाई?
  • लेट-लतीफी का खामियाजा: क्या ऐन वक्त पर टिकट की घोषणा करना संगठन की सबसे बड़ी भूल साबित हुई?
  • स्थानीय नेतृत्व की जवाबदेही: सिंबल मिलने के बाद भी प्रत्याशी को नामांकन कक्ष तक समय पर न पहुंचा पाने का जिम्मेदार कौन है?

नगर पालिका बोर्ड के गणित पर पड़ सकता है असर

निकाय चुनाव में एक-एक वार्ड का परिणाम बोर्ड बनाने और अध्यक्ष (चेयरमैन) की कुर्सी तय करने में बेहद निर्णायक होता है। अगर चुनाव के बाद बहुमत का आंकड़ा महज एक सीट पर फंसता है, तो वार्ड 27 का यह घटनाक्रम भाजपा के लिए बेहद दर्दनाक साबित हो सकता है।

फिलहाल, बीदासर निकाय चुनाव के इस सबसे अनोखे घटनाक्रम ने भाजपा को बैकफुट पर धकेल दिया है। अब इस वार्ड में मुकाबला केवल अन्य राजनीतिक दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच सिमट कर रह गया है।

(खबर मीडिया की विशेष रिपोर्ट)

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