910 मतदाताओं वाले हॉट वार्ड में भाजपा, RLP और निर्दलीयों के बीच मुकाबला; 9 वोट से लेकर 362 वोट की जीत का इतिहास बना रहा रोमांचक समीकरण
बीदासर। बीदासर निकाय चुनाव में अगर किसी वार्ड पर सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चाएं और नजरें टिकी हैं, तो उनमें वार्ड नंबर 4 का नाम सबसे ऊपर आता है। कुल 910 मतदाताओं वाले इस हॉट वार्ड में इस बार मुकाबला सिर्फ उम्मीदवारों के बीच नहीं है, बल्कि जातीय गणित, व्यक्तिगत संपर्क, पुराने चुनावी संबंधों और राजनीतिक साख के बीच भी है।
इस वार्ड में भाजपा से संतोष महिया, RLP से जितेंद्र सिंह राठौड़ और निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मोहरा कंवर राजपुरोहित व बेगराज नाई चुनावी मैदान में हैं। कांग्रेस उम्मीदवार की गैर-मौजूदगी ने मुकाबले को पूरी तरह खुला और बेहद दिलचस्प बना दिया है।
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वार्ड का सामाजिक गणित: बड़े समूहों के साथ छोटे वोट भी निर्णायक
वार्ड 4 के अनुमानित सामाजिक आंकड़ों के अनुसार, यहाँ लगभग 182 जाट, 177 राजपुरोहित, 163 नाई और करीब 92 यादव मतदाता हैं। इसके अलावा 53 राजपूत, 47 भार्गव, 41 ब्राह्मण, 33 स्वामी, 31 दर्जी, 26 सुनार, 20 मेघवाल और 19 सिद्ध समाज के मतदाता शामिल हैं।
बड़े सामाजिक समूहों के उम्मीदवार मैदान में होने के कारण असली खींचतान इस बात को लेकर है कि बाकी मतदाता किस तरफ रुख करते हैं और बड़े धड़ों के वोट कितने बंटते हैं।
| प्रत्याशी का नाम | पार्टी / सिंबल | मुख्य प्रभाव व आधार |
| संतोष महिया | भारतीय जनता पार्टी (BJP) | संगठन कैडर व चेयरमैन पद की संभावित दावेदारी |
| जितेंद्र सिंह राठौड़ | राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) | युवा वर्ग व त्रिकोणीय मुकाबले का समीकरण |
| मोहरा कंवर राजपुरोहित | निर्दलीय | पारिवारिक प्रभाव व राजपुरोहित-राजपूत-ब्राह्मण गोलबंदी |
| बेगराज नाई | निर्दलीय | व्यक्तिगत जनाधार व 2021 की 362 वोटों की बड़ी जीत का ट्रैक रिकॉर्ड |
इतिहास गवाह है: 9 वोटों की जीत से लेकर 362 वोटों के अंतर तक का रोमांच
वार्ड नंबर 4 को समझने के लिए इसके दिलचस्प इतिहास को देखना जरूरी है:
- वर्ष 2015: बेगराज नाई ने भाजपा के सिंबल पर चुनाव जीतकर अपनी पकड़ साबित की।
- वर्ष 2021: टिकट कटने पर बेगराज नाई निर्दलीय उतरे और भाजपा प्रत्याशी को 362 वोटों के बड़े अंतर से हराया। इसी साल उन्होंने निर्दलीय चेयरमैन का चुनाव लड़ा और कांग्रेस समर्थन के बावजूद महज 3 वोटों से चूके।
- वर्ष 2010: माल सिंह राजपुरोहित के प्रभाव के बावजूद निर्दलीय जयप्रकाश बैंगानी ने मात्र 9 वोटों से जीत दर्ज की थी। (जयप्रकाश बाद में उपाध्यक्ष बने)।
- वर्ष 2005: भाजपा की सावित्री देवी सोनी यहाँ से पार्षद बनीं और आगे चलकर पालिका चेयरमैन पद तक पहुंचीं।
दिलचस्प राजनीतिक कनेक्शन यह भी है कि 2010 में चुनाव लड़ने वाले माल सिंह राजपुरोहित, वर्तमान निर्दलीय उम्मीदवार मोहरा कंवर के ससुर हैं। वहीं चर्चा यह भी रही है कि 2021 में बेगराज नाई की बड़ी जीत में इस परिवार का सहयोग रहा था।
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2026 की चुनावी बिसात: जुगलबंदी और समीकरणों का खेल
वर्तमान में वार्ड के भीतर दो बड़े राजनीतिक कयास तैर रहे हैं:
- राजपुरोहित-राजपूत-ब्राह्मण समीकरण: मोहरा कंवर राजपुरोहित के पक्ष में यदि यह सामाजिक गोलबंदी मजबूत होती है, तो मुकाबले की पूरी तस्वीर बदल सकती है।
- जाट-यादव जुगलबंदी: यदि यह बड़ा मत समूह किसी एक प्रत्याशी के पक्ष में लामबंद होता है, तो चुनावी पलड़ा पूरी तरह झुक सकता है। वहीं RLP प्रत्याशी जितेंद्र सिंह राठौड़ राजपूत व अन्य वर्गों में सेंधमारी कर बड़ा उलटफेर करने में सक्षम हैं।
भाजपा प्रत्याशी संतोष महिया को पार्टी संगठन और अनुशासन का सीधा लाभ मिलता दिख रहा है। गलियारों में चर्चा है कि यदि संतोष महिया पार्षद बनती हैं, तो भाजपा चेयरमैन पद के लिए उनके नाम पर दांव खेल सकती है। वहीं बेगराज नाई का व्यक्तिगत संपर्क और पुराना चुनावी अनुभव किसी भी गणित को बिगाड़ने का माद्दा रखता है।
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