कहीं दावेदारों की लंबी कतार तो कहीं एक ही परिवार में दो-दो टिकट; टिकट वितरण के नए समीकरणों से गरमाई बीदासर की सियासत
बीदासर। नगर निकाय चुनाव का बिगुल बजने के साथ ही शहर की सियासत पूरी तरह चुनावी रंग में रंग चुकी है। टिकटों को लेकर कई दिनों से जारी जोड़-तोड़ और खींचतान के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है।
सूची जारी होते ही कहीं जश्न का माहौल है, तो कहीं लंबे समय से निष्ठापूर्वक लगे कार्यकर्ताओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। चुनावी गलियारों में अब वही पुरानी कहावत जोरों पर तैर रही है— “कहीं घी घणा… तो कहीं मुट्ठी भर चणा!”
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भाजपा की सूची में सबसे ज्यादा चर्चा: वार्ड 8 और 9 में देवरानी-जेठानी आमने-सामने!
भाजपा के टिकट बंटवारे में सबसे चर्चित और चौंकाने वाला समीकरण दो पड़ोसी वार्डों में देखने को मिला है। यहाँ पार्टी ने एक ही परिवार की दो महिलाओं पर भरोसा जताया है:
- वार्ड नंबर 8: पूनम (पत्नी कमल सैनी)
- वार्ड नंबर 9: पूनम (पत्नी ललित सैनी)
रिश्ते में देवरानी-जेठानी लगने वाली इन दोनों प्रत्याशियों को टिकट दिए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या यह पारिवारिक रसूख भाजपा के लिए दोनों सीटें निकालने में मददगार साबित होगा या फिर टिकट से वंचित रहे कार्यकर्ताओं का आक्रोश पार्टी का खेल बिगाड़ेगा?
कांग्रेस ने खेला पति-पत्नी का दांव
भाजपा की ही तरह कांग्रेस ने भी पारिवारिक समीकरणों को तवज्जो दी है। कांग्रेस की सूची में दो प्रमुख वार्डों से पति-पत्नी का जोड़ा मैदान में है:
- वार्ड नंबर 7: गिरधारी मेहला (कांग्रेस प्रत्याशी)
- वार्ड नंबर 9: सोना देवी मेहला (कांग्रेस प्रत्याशी – गिरधारी मेहला की पत्नी)
जहाँ एक तरफ आम कार्यकर्ताओं के लिए एक टिकट पाना भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा था, वहीं एक ही परिवार को दो टिकट मिलने से असंतुष्ट खेमे में भीतरघात की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।

टिकट तो मिल गया, पर असली परीक्षा जनता की अदालत में
पार्टी का सिंबल मिलना जीत की पहली सीढ़ी जरूर है, लेकिन वार्ड स्तर के चुनावों में व्यक्तिगत छवि, सामाजिक संबंध और स्थानीय मुद्दे बेहद निर्णायक होते हैं।
बागियों का डर बढ़ाएगा धुकधुकी
दोनों ही प्रमुख दलों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने-अपने असंतुष्ट और बागी नेताओं को साधने की है। यदि टिकट से वंचित रहे दावेदार निर्दलीय के रूप में डटे रहते हैं, तो चंद वोटों का हेर-फेर भी भाजपा और कांग्रेस का पूरा गणित बिगाड़ सकता है।
अब टिकट पाने की दौड़ खत्म हो चुकी है और असली जंग वोट हासिल करने की शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि जनता भाजपा के पारिवारिक प्रयोग और कांग्रेस के पति-पत्नी वाले दांव पर क्या फैसला सुनाती है।
(बीदासर निकाय चुनाव की विस्तृत कवरेज | खबर मीडिया)


